जब बोझ गिरा, तब जीवन समझ आया
जब बोझ गिरा, तब जीवन समझ आया जीवन को हम कैसे देखते हैं, यह पूरी तरह हमारे दृष्टिकोण …
जब बोझ गिरा, तब जीवन समझ आया जीवन को हम कैसे देखते हैं, यह पूरी तरह हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। जब हम अनावश्यक बोझ छोड़ देते हैं, तो जीवन अप…
और पढ़ेंजमी हुई नदी सुमित और रोहित लद्दाख के एक छोटे से गाँव में रहते थे। एक बार दोनों ने फैसला किया कि वे गाँव छोड़कर शहर जायेंगे और वहीँ कुछ काम-धंधा खोजें…
और पढ़ेंमान या अपमान आपका मान या अपमान किसी दूसरे शख्स के कहने पर नहीं होता. अगर आप चाहे तो किसी के कहे शब्द ले सकते हैं और न चाहें तो छोड़ दीजिए. एक समय की…
और पढ़ेंलक्ष्मी का वास एक बहुत धनी सेठ थे। एक रात उन्होंने स्वप्न देखा कि लक्ष्मीजी उनसे कह रही हैं, “सेठ! मैंने बहुत दिनों तक तुम्हारे यहां निवास किया है। …
और पढ़ेंभगवान का मंगल विधान पुरानी बात है - कलकत्ते में सर कैलासचन्द्र वसु प्रसिद्ध डॉक्टर हो गये हैं। उनकी माता बीमार थीं। एक दिन श्रीवसु महोदय ने देखा—म…
और पढ़ेंमाँ के ममत्व की पराकाष्ठा गाँव के सरकारी स्कूल में संस्कृत की क्लास चल रही थी। गुरूजी दिवाली की छुट्टियों का कार्य बता रहे थे। तभी शायद किसी शरारती…
और पढ़ेंविजेता बनिए एक दिन एम्प्लाइज जब ऑफिस पहुंचे तो उन्हें गेट पर एक बड़ा सा नोटिस लगा दिखा: ” इस कंपनी में जो व्यक्ति आपको आगे बढ़ने से रोक रहा था कल …
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