जब बोझ गिरा, तब जीवन समझ आया
जब बोझ गिरा, तब जीवन समझ आया जीवन को हम कैसे देखते हैं, यह पूरी तरह हमारे दृष्टिकोण …
पहले सोचें, घबराएं नहीं परिस्थितियां कभी जीवन में एक जैसी नहीं रहती, जीवन में भंवर में उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं आपकी सोच बताती है कि आप कठिन पर…
और पढ़ेंमानव चरित्र एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति ने एक संत से प्रश्न किया, “महाराज, रंग रूप, बनावट प्रकृति में एक जैसे होते हुए भी कुछ लोग अत्यधिक उन्नति कर…
और पढ़ेंरोमांच और नयापन जापान में हमेशा से ही मछलियाँ खाने का एक ज़रुरी हिस्सा रही हैं । और ये जितनी ताज़ी होतीं हैँ लोग उसे उतना ही पसंद करते हैं । लेकिन…
और पढ़ेंजली रोटी माँ ने एक शाम दिनभर की लम्बी थकान एवं काम के बाद जब डिनर बनाया तो उन्होंने पापा के सामने एक प्लेट सब्जी और एक जली हुई रोटी परोसी। मूझे लग…
और पढ़ेंझगड़े का मूल कारण एक बार एक सेठ अपनी दुकान पर बेठे थे.. दोपहर का समय था इसलिए कोई ग्राहक भी नहीं था तो वो थोड़ा सुस्ताने लगे.. इतने में ही एक संत …
और पढ़ेंतपस्या का फल भगवान शंकर को पति के रूप में पाने हेतु माता-पार्वती कठोर तपस्या कर रही थी। उनकी तपस्या पूर्णता की ओर थी। एक समय वह भगवान के चिंतन में …
और पढ़ेंमाँ का कंबल सर्दियों के मौसम में एक बूढ़ी औरत अपने घर के कोने में ठंड से तड़प रही थी। जवानी में उसके पति का देहांत हो गया था। घर मे एक छोटा बेटा था। …
और पढ़ें
जब बोझ गिरा, तब जीवन समझ आया जीवन को हम कैसे देखते हैं, यह पूरी तरह हमारे दृष्टिकोण …
Social Plugin